પ્રારબ્ધ અને પુરુષાર્થ

                    પ્રારબ્ધ અને પુરુષાર્થ આપણા દરેકનું જીવન પ્રારબ્ધ અને પુરુષાર્થ પર ટકેલું છે પ્રારબ્ધ ભૂતકાળમાં કરેલા પુરુષાર્થનું પરિણામ છે અને વર્તમાનમાં આપણે જે કંઇ કરી રહ્યા છે એ આપણો પુરુષાર્થ છે.       ઘણીવાર એવું થતું હોય છે કે આપણે પુરુષાર્થ તો વર્તમાનમાં કરીએ છીએ અને પરિણામ પણ વર્તમાનમાં જ જોઇએ છે હા એવા કેટલાક કર્મો છે જેનું આપણને તાત્કાલિક ફળ મળે છે પણ એવા કેટલાક કર્મો જેને આપણે પુરુષાર્થ કહીએ છીએ જેનું ફળ આપણને તાત્કાલિક નહિ મળતું અને આ ભેગું થયેલું કર્મ આપણા દરેકની આવતીકાલ બનાવે છે. જે માણસને પુરુષાર્થ અને પ્રારબ્ધનું જ્ઞાન છે જે તેને જાણે છે તે ક્યારેય કોઇપણ પરિસ્થિતિ તેની સાથે બને તેનાથી તે દુઃખી થતો નથી તે બસ તેના કાર્યમાં વ્યસ્ત રહે છે.લોકો કહે છે માણસ બદલાય છે માણસ ત્યારે જ બદલાય જ્યારે પરિસ્થિતિ બદલાવાની હોય જ્યાં સુધી પરિસ્થિતિ ના બદલાય ત્યાં સુધી કોઇ માણસ ક્યારેય બદલાતો નથી. એક દાખલા જોઈએ તો ,   દા. ત ,  કોઇ અમીર મિત્ર આપણો મિત્ર હોય અને એ આપણા પાછળ ઘણા પૈસા વાપરે છે પણ ધીમ...

"खुशमय जीवन का दुश्मन डर है"

'डर' शब्द मनुष्य को तब से सताता हैं  जबसे  उसको समज  आई  है। बचपन में  माँ का डर, पिता का डर, बड़े भाई का डर, शिक्षक का डर, हर किसी को  किसी न किसी बात का डर हंमेशा रहेता हि है लेकिन क्या आपने कभी जाना है कि यह डर क्या है?
 घरमे  किसी  को  कहे  बिना  खेलने के लिए जा रहा था और उसे डर था कि अगर वह देर से घर आया तो उसके पिता उसे धमकी देंगे या गिलास उसके हाथ से फिसल जाएगा और वह डर जाएगा कि उसकी माँ क्या कहेगी।
डर है कि भाई की घड़ी उसे कहे  बिना ले  जाना और शायद घडी का डायल ग्लास टूट जाएगा और उसे घर वापस लाएगा और भाई बोलेगा। यह सब  डर  सिर्फ घर के अंदर पैदा होने वाले डर का उदाहरण है, लेकिन ऐसे बहुत से काम हैं जो व्यक्ति के मन मे डर पैदा  करता  हे।
   एक और उदाहरण है स्कूल में गृहकार्य न ले जाने का पर शिक्षक द्वारा पीटे जाने का डर, समय पर कार्यालय में काम न  करना और बॉस के बोलने का डर, देर रातमे  ऐसी सड़क पर से  घर  आना जहाँ किसी  भी  खम्भे की लाइट न हो, और वहा कुछ लूट जाने का भय हो, किसी अजनबी सड़क पर किसी अजनबी द्वारा अचानक चिल्लाए जाने का भय, परीक्षा में पेपर कैसे आएगा उसका  डर ,  परीक्षा का परिणाम क्या होगा उसका  डर , जीवन मे  हर  किसीको  किसी  न  किसी  बात का  डर  रहेता है ... यह अक्सर हम सभी को परेशान करता है।
  डर क्या है? एक काल्पनिक विचार है। हमारे मन में। काम करने के दो तरीके हैं, जैसे अतीत की एक घटना को याद करना और भविष्य के बारे में सोचना।
इन दोनों क्रियाओं से भय भी उत्पन्न होता है।
कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि अतीत में मेरे साथ ऐसा हो चुका है, इसलिए सावधान रहें कि आप भी ऐसा न करें। अब हम एक पल के लिए इस  बात  को  भूल जाये और सोचें कि अगर ऐसा उसके साथ हुआ होता तो मेरे साथ भी ऐसा ही होगा । अब हम सिर्फ ये सोचते  हे  कि मेरे  साथ क्या होगा और हम इन बातों में आकर अपने मन में डर पैदा कर रहे हैं। और जब समय आता है, तो ऐसा कुछ भी नहीं होता है। लेकिन हम सभी के दिमाग में बस अतीत की एक घटना बस गई है, इसलिए हम अपने वर्तमान को अच्छे से जी भी नहीं  सकते।
 डर से इतना मत डरिए कि आपकी  खुशी भरी जिंदगी चिंता में बदल जाए। जो होना है वो होगा। हमें इस बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है  वर्तमान में की भविष्य में क्या होने वाला है लेकिन हमें वर्तमान मे जीना होगा।
डर से क्या होता है? हमारा जीवन जीने के लिए है, लेकिन कुछ बाते भविष्य की चिंताओं और अतीत की घटनाओं के डर से हमारे दिमाग मे घूमती रहती हे  और इस वजह से हम जीवन जी नहीं सकते हैं। आपको पता होना चाहिए कि मानव जीवन कई जन्मों के बाद प्राप्त होता है। मनुष्य एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसे ईश्वर ने सोचने की शक्ति दी है, इसलिए हम इसका उपयोग अतीत की घटनाओं को याद करने और उन चीजों को सोचने के लिए करते हैं जो भविष्य में होने वाली नहीं हैं, और यह दिन-प्रतिदिन हमारे जीवन को छोटा करती
रहती है। हां, कुछ नया करने की तीव्रता दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है। जब हम किसी जगह  पर मानसिक रूप से मौजूद नहीं होते हैं, जहां हम पुरानी बातो  जो  हमारे  साथ पहले बीती  हुई  हे वो  याद करते हे  या इस बात की चिंता होती है कि हम भविष्य में क्या करेंगे, तो हमें उस जगह पर किसी भी  तरह की खुशी महसूस नहीं होती और ऐसा हो सकता है कि इस  बातो को सोचने से हम सामने वाले व्यक्ति से बात भी न करें और उस व्यक्ति से हमारा रिश्ता भी टूट जाये।
इस प्रकार हम डर से बहुत कुछ खो सकते हैं। और हम अपने मन मे  हि सोचने लगते हैं और अपने स्वयं के मन में हम एक अलग अपनी दुनिया बना लेते हे और वास्तविकता की दुनिया में हमारा कोई अस्तित्व नहीं रहेता ।
उस समय हमारा दिमाग केवल उन चीजों के बारे में सोचता है जो हमारे साथ कभी हुई  हि  नहीं और सायद  आगे भी कुछ होना न हो और वहां आपकी छवि औरो  के सामने एक पागल व्यक्ति की हो  जाती  हे की  यह  व्यक्ति  तो पागल है  इससे  बात  करने  से  हमारा  समय बर्बाद होगा।
डर से बचने के लिए क्या करें?

डर से भागने का एकमात्र तरीका उन चीजों के बारे में नहीं सोचना है जो अभी तक नहीं हुई हैं और कभी नहीं सोचते कि अतीत में जो चीजें हुई हैं, वे भविष्य में भी  होंगी। यही एक डर से भागने का तरीका है।
   लेख पढ़ने के लिए आपका बहोत बहोत धन्यवाद
                                                          

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