પ્રારબ્ધ અને પુરુષાર્થ

                    પ્રારબ્ધ અને પુરુષાર્થ આપણા દરેકનું જીવન પ્રારબ્ધ અને પુરુષાર્થ પર ટકેલું છે પ્રારબ્ધ ભૂતકાળમાં કરેલા પુરુષાર્થનું પરિણામ છે અને વર્તમાનમાં આપણે જે કંઇ કરી રહ્યા છે એ આપણો પુરુષાર્થ છે.       ઘણીવાર એવું થતું હોય છે કે આપણે પુરુષાર્થ તો વર્તમાનમાં કરીએ છીએ અને પરિણામ પણ વર્તમાનમાં જ જોઇએ છે હા એવા કેટલાક કર્મો છે જેનું આપણને તાત્કાલિક ફળ મળે છે પણ એવા કેટલાક કર્મો જેને આપણે પુરુષાર્થ કહીએ છીએ જેનું ફળ આપણને તાત્કાલિક નહિ મળતું અને આ ભેગું થયેલું કર્મ આપણા દરેકની આવતીકાલ બનાવે છે. જે માણસને પુરુષાર્થ અને પ્રારબ્ધનું જ્ઞાન છે જે તેને જાણે છે તે ક્યારેય કોઇપણ પરિસ્થિતિ તેની સાથે બને તેનાથી તે દુઃખી થતો નથી તે બસ તેના કાર્યમાં વ્યસ્ત રહે છે.લોકો કહે છે માણસ બદલાય છે માણસ ત્યારે જ બદલાય જ્યારે પરિસ્થિતિ બદલાવાની હોય જ્યાં સુધી પરિસ્થિતિ ના બદલાય ત્યાં સુધી કોઇ માણસ ક્યારેય બદલાતો નથી. એક દાખલા જોઈએ તો ,   દા. ત ,  કોઇ અમીર મિત્ર આપણો મિત્ર હોય અને એ આપણા પાછળ ઘણા પૈસા વાપરે છે પણ ધીમ...

" धैर्य का अनुभव "

धैर्य का अर्थ प्रतीक्षा करना है। आज मे  आपको प्रतीक्षा के बारे मे कुछ बताने जा रहा हु.
     
हम सभी को कभी इंतजार (प्रतीक्षा) करने की आदत नहीं है। जो होना चाहिए वह जल्द होना चाहिए। हम सभी को  इंतजार (प्रतीक्षा)  करना पसंद नहीं है। घर का एक उदाहरण देता हु। हम दूध गर्म होने पर भी कुछ मिनटों तक  इंतजार (प्रतीक्षा)  नहीं कर सकते। हम  सब यही सोचते है की हर काम जल्द हो जाना चाहिए। यहां तक ​​कि अगर आपको किसी के आने की  इंतजार (प्रतीक्षा)करना  पड़े  तो भी हम  इंतजार (प्रतीक्षा)  नहीं कर सकते और जब  वो थोड़ी देर  के बाद आये तो उसको देर होना का कारण  ना पूछते हुए  बस कुछ सोचे बिना हि हम  उसको बहोत गालिया दे देते  है और उसको कभी पूछते  भी नहीं की देर क्यों हुई। और जब हमें मालूम पड़ता हे की इसकी देर  से आने  का कारण कुछ और उस वक्त हम इंग्लिश का एक शब्द है उन  शब्द का प्रयोग करके सब बाते भूल जाओ यार मेरे से बहोत बड़ी भूल हो गयी और  माफ कर दे यार (I am sorry friend) शब्द का प्रयोग करते है. इस प्रकार, हम कई घटना या प्रसंग के होने की  इंतजार (प्रतीक्षा)  नहीं करना चाहते हैं। अगर हम वर्तमान स्थिति के बारे में बात करते हैं, तो दुनियाभर में कोरोना की महामारी चल रही है और इसका असर हमारे देश पर भी है। इसके कारण, हमारे देश में कई दिनों तक लॉकडाउन  किया हुआ है  और अबभी भी हम सब लोकडाउन मे फसे  है। अब हम सभी इस लॉकडाउन के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं और हम सब  लोग पहले की तरह जीवन जीना शुरू करना  चाहते है । ये इच्छाएं लाखों लोगों के मन में उत्पन्न हो रही हैं और एक व्यक्ति के दिमाग में नहीं हैं और कुछ लोगों की दिमाग़ मे तरह तरह  की योजनाएं भी बन  चुकी है। जब लॉकडाउन खत्म हो जाएगा तो  मैं यह  खाने जाऊंगा, मैं इससे मिलने जाऊंगा, मैं यहां टहलने जाऊंगा, कुछ लोग केवल चार या पांच दिनों के लिए टहलने मे हि अपना दिन गुजारेंगे। लेकिन समय के साथ, इस परीस्थिति की बदलाव की संभावना है। लॉकडाउन के पहले हमने कितने प्रोग्राम बनाए थे क्या लॉकडाउन के कारण उन सभी कार्यक्रमों को रद्द करना पड़ा. क्या हमने इसे पूरा करने का कुछ  भी  प्रबंधन कर  शके, क्या एक भी काम हम जिद्द  करके पूरा कर शके। ऐसे तो कितने लोगों के काम अटके हुए हैं। यह अच्छा है कि हम अपने घर पर हैं, लेकिन कुछ लोग काम को लेकर ऐसी जगह फंसे हुए हैं जिन्होंने  कई दिनों से अपने घर के सभी सदस्यों के चेहरे भी नहीं देखे।  शायद अच्छा हे हम सब सुरक्षित  अपने घर पर  है। कुछ और दिन इंतजार (प्रतीक्षा) कर लो।
समय के साथ, लॉकडाउन भी ख़तम हो जाएगा
और जिस दिन लॉकडाउन  को खोला जाएगा उसी
 दिन से हमारे जीवन के वो जीने के दिन भी लौट आएंगे, बस इस समय तक थोड़ा इंतजार (धैर्य) रखे। यदि आप धैर्य रख सकते हैं, तो आप दूसरों को शांति से समझाकर धैर्य रखा सकते हैं।
     लेख पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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